दिल्ली में आर्य समाज विवाह: वैदिक और विधिक विवाह
आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन – समाजसेवा और सच्चे विवाहों की दिशा में अग्रणी संस्था
स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य सत्य, सरलता और वैदिक मूल्यों पर आधारित समाज सुधार है। आर्य समाज मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा, शिक्षा, और न्याय का केंद्र भी है।
आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन अपनी विभिन्न सेवाओं — जैसे कन्यादान के लिए दान कार्यक्रम, भोजन वितरण, कानूनी सहायता, और सामाजिक कल्याण योजनाओं — के माध्यम से मानवता की सच्ची सेवा करता है।
Frequently asked
Questions
आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन क्या है?
उत्तर: आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन एक सामाजिक और धार्मिक संस्था है जो स्वामी दयानंद सरस्वती के वैदिक सिद्धांतों पर कार्य करती है। यह संस्था वैदिक विवाह, समाज सुधार, शिक्षा, दान और सेवा के माध्यम से एक श्रेष्ठ और समान समाज के निर्माण का लक्ष्य रखती है।
2. आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य है —
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समाज में सत्य, समानता और नैतिकता का प्रसार करना।
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विवाह, शिक्षा और सेवा के माध्यम से मानवता की उन्नति करना।
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समाज से भेदभाव, आडंबर और कुप्रथाओं को समाप्त करना।
3. क्या आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन केवल विवाह ही कराता है?
उत्तर: नहीं, यह संस्था केवल विवाह तक सीमित नहीं है। फाउंडेशन कन्यादान सहायता, भोजन वितरण, कानूनी परामर्श, शिक्षा और समाज सुधार कार्यक्रम, और महिला सशक्तिकरण अभियानों में भी सक्रिय रूप से भाग लेती है।
4. आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन द्वारा कराए जाने वाले विवाह कैसे होते हैं?
उत्तर: फाउंडेशन द्वारा कराए जाने वाले विवाह पूरी तरह वैदिक रीति-रिवाजों और भारतीय कानून के अनुरूप होते हैं। विवाह में वैदिक मंत्र, अग्नि पूजन, सात फेरे (सप्तपदी) और परस्पर सहमति के संस्कार संपन्न कराए जाते हैं।
5. क्या आर्य समाज मंदिर फाउंडेशन में कराए गए विवाह कानूनी रूप से मान्य हैं?
उत्तर: हाँ, फाउंडेशन में संपन्न विवाह हिंदू विवाह अधिनियम (1955) या विशेष विवाह अधिनियम (1954) के अंतर्गत पूरी तरह वैध होते हैं। विवाह के बाद फाउंडेशन विवाह प्रमाणपत्र प्रदान करता है, जो सरकारी स्तर पर मान्य होता है।


